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Tuesday, June 4, 2013

टूट कर इस कदर बिखर गया

टूट कर इस कदर बिखर गया
पत्थर जब आईने के घर गया

दिन रात कुछ जला इस तरह
खाक हुस्न कुछ और निखर गया

दिल में बसा रहा खंजर की तरह
उम्र के साथ साथ गहरा उत गया

ढूँढता किसे हूँ वीरान गलियों में
दोस्ती का ख्वाब उसको अखर गया

-- अश्विनी ग्गा
04 जून 2013

Tuesday, February 1, 2011

साया भी ज़िन्दगी से

दोस्तों,

जिन दिनों मैं सीडलिंग स्कूल में कार्यरत था तब स्कूल की वार्षिक पत्रिका में ये ग़ज़ल प्रकाशित हुई थी। लीजिये उसकी प्रति आप सभी के समक्ष रख रहा हूँ।


आपकी राय का ब्लॉग पर स्वागत है।

आपका अश्विनी!

Monday, January 24, 2011

आईना

दोस्तों,

आज एक और रचना आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ। ये राजस्थान पत्रिका, जयपुर में दिनांक ०५ फ़रवरी २००४ को प्रकाशित हुई थी।



कृपया आपकी राय दें।

धन्यवाद्,
आपका अश्विनी ।

Thursday, January 14, 2010

नया साल

प्रिय दोस्तों,

१३ जनवरी २०१० को समाचार पत्र "डेली न्यूज़" में मेरी ग़ज़ल "नया साल" प्रकाशित हुई। रचना आपके समक्ष प्रस्तुत है। आपके सुझाव एवं विचार सादर आमंत्रित हैं।



आपका,
अश्विनी बग्गा।

Sunday, December 13, 2009

ज़िन्दगी

प्रिय दोस्तों,

अपने क्रम से उल्टा चल रहा हूँ, इसके लिए माफ़ी चाहता हूँ। मेरी एक ग़ज़ल "ज़िन्दगी" राजस्थान पत्रिका में २७-०६-२००८ को प्रकाशित हुई थी, इसे भी आप सभी के साथ बाँटना चाहता हूँ। पढ़िए ज़िन्दगी का लुत्फ़ उठाइए और बताइए की रचना कैसी लगी



धन्यवाद,
अश्विनी बग्गा।



Saturday, December 5, 2009

मेरा शहर

दोस्तों,

पिछले दिनों अख़बार में मेरी ग़ज़ल प्रकाशित हुई, खयाल आया की क्यों इसे अपने ब्लॉग पर भी सभी से बाँटा जाए तो लीजिये प्रस्तुत है मेरी ग़ज़ल "मेरा शहर" प्रकाशन तिथि २८-११-२००९, राजस्थान पत्रिका, जयपुर। पृष्ठ संख्या १८.


सही मायने में अभी मैं इस पर और काम करना चाहता हु, मुझे इसे और सवारने की गुंजाईश नज़र आती है। आपकी राय का ब्लॉग पर स्वागत है।

धन्यवाद।